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शब्द-शब्द अनमोल पर आपका स्वागत है !

संवाद सम्मान-2009

आपका स्वागत है शब्द-शब्द अनमोल पर... हम लेकर आयें हैं आपके लिए अनमोल शब्दों की प्रासंगिकता सहित प्रस्तुति.....भारतीय सनातन संस्कृति से जुड़े हिंदी के दुर्लभ-विस्मयकारी और महत्वपूर्ण शब्दों की व्याख्या, शब्दों की उत्पति तथा उन शब्दों से जुडी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियाँ....

Saturday, June 11, 2011

दलित समाज की व्यथा

अभी हाल ही में मेरा एक 
उपन्यास आया है 
ताकि बचा रहे लोकतंत्र 
जिसकी यत्र -तत्र-सर्वत्र 
चर्चा हो रही है 
इसी चर्चा के क्रम में 
आज दैनिक जनासंदेश टाइम्स में 
पढ़िए -
शिवानी श्रीवास्तव की वेवाक राय 
इस पुस्तक के सन्दर्भ में......

Wednesday, June 8, 2011

सुबह-ए-बनारस

एक कविता


करतालों की जगह

बजने लगा है पाखण्ड

अन्धविश्वास

रुढियों को कंधे पे लटकाए

सीढियां चढ़ रहा है

चट्ट चट्ट

लज्जित है सुबह की

सूर्य की किरणें

खंड-खंड तोता रटंत

यजमान लुभाते आख्यान

एक अखंड मुजरा

एक तेलौस मेज पर

टेल हुए नाश्ते के सामान

फैला पाश्चात्य

सुबह-ए- बनारस !

  • रवीन्द्र प्रभात
(दैनिक जन्संदेश टाइम्स/ ०७ जून २०११ )

Monday, September 6, 2010

गुरु का अभिप्राय


गुरु (संस्कृत शब्द, अर्थात भारी या महत्वपूर्ण, इसलिए आदरणीय या श्रद्धेय ), हिन्दू धर्म में एक व्यक्तिगत अध्यात्मिक शिक्षक या निर्देशक, जिसने अध्यात्मिक अंतर्दृष्टि प्राप्त कर ली हो । कम से कम उपनिषदों के समय से भारत में धार्मिक शिक्षा में गुरुकुल पद्धति के महत्व पर जोर दिया जाता रहा है । प्राचीन भारत की शैक्षिक प्रणाली में वेदों का ज्ञान व्यक्तिगत रूप से गुरुओं द्वारा मौखिक शिक्षा के माध्यम से शिष्यों को दिया जाता था । पारंपरिक रूप से पुरुष शिष्य गुरुओं के आश्रम में रहते थे और भक्ति तथा आज्ञाकारिता से उनकी सेवा करते थे ।
बाद में भक्ति आन्दोलन के उत्थान के साथ , जो ईष्ट देवता के प्रति भक्ति पर जोर देता है , गुरु और भी महत्वपूर्ण चरित्र बन गए, किसी संप्रदाय के प्रमुख या संस्थापक के रूप में वह श्रद्धा के पात्र थे और उन्हें अध्यात्मिक सत्य का जीवित मूर्तिमान रूप माना जाता था । इसप्रकार उन्हें देवता के जैसा सम्मान प्राप्त था । गुरु के प्रति सेवा भाव और आज्ञाकारिता की परंपरा अब भी विद्यमान है ।
मूलतः गुरु वह है जो ज्ञान दे । संस्कृत भाषा के इस शब्द का अर्थ शिक्षक और उस्ताद से लगाया जाता है । हिन्दू तथा सिक्ख धर्म में गुरु का अर्थ धार्मिक नेताओं से भी लगाया जाता है ।
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Saturday, September 4, 2010

अज़ान का मतलब है उद्घोषणा

हमारा भारतीय समाज कई संस्कृति और कई भाषाओं का अनोखा गुलदस्ता है , गाहे- बगाहे हमें विभिन्न भाषाओँ के उन शब्दों को अंगीकार करने की आवश्यकता महसूस होती है जो हिन्दी में घुली-मिली है । इन्हीं भाषाओं में से एक है अरबी भाषा , जिसके बहुतेरे शब्द हिन्दी और उर्दू भाषा में काफी प्रमुखता के साथ प्रयुक्त होते रहे हैं । वर्णानुक्रम में यद्यपि हम अ श्रेणी के शब्दों की व्याख्या प्रस्तुत कर रहे हैं .....इसीक्रम में एक शब्द आया है "अजान" जिसका प्रयोग उर्दू और हिन्दी में सामान रूप से आम-बोलचाल में होता है ......, आईये इस शब्द के बारे में विस्तार से जानने का प्रयास करते हैं -
(अरबी में अधान: उद्घोषणा), शुक्रवार (जुमे) की सार्वजनिक नमाज़ और पांच दैनिक नमाज़ों के लिये मुस्लिम पुकार। इसकी घोषणा मुअज्जिन करता है, जो अपने अच्छे चरित्र के कारण मस्जिद का सेवक चुना जाता है, छोटी मस्जिदों में वह दरवाजे़ पर या बग़ल में खड़े होकर और बड़ी मस्जिदों में मीनार पर चढ़कर अज़ान देता है। मूलतः अज़ान प्रार्थना के लिये बुलावा था, लेकिन परंपरा के अनुसार, मुहम्मद साहब ने इस बुलावे को ज़्यादा सम्मानजनक बनाने की दृष्टि से अपने शिष्यों से विचार-विमर्श किया, अब्द अल्लाह बिन जायद को सपना आने पर कि निष्ठावानों को कोई आवाज़ लगाकर बुलाए, मामला तय हो गया। सुन्नी मत की मानक अज़ान का अनुवाद इस प्रकार किया जा सकता है: ‘अल्लाह सबसे महान है। मैं मानता हूं कि अल्लाह के अलावा और कोई ईश्वर नहीं है।‘ मैं स्वीकार करता हूं कि मुहम्मद अल्लाह के पैग़ंबर हैं। नमाज़के लिए आओ। मुक्ति के लिए आओ। अल्लाह सबसे महान है। अल्लाह के अलावा और कोई ईश्वर नहीं हैं।‘ पहले वाक्यांश की चार बार उद्घोषणा की जाती है और अंतिम वाक्यांश की एक बार तथा अन्य सभी वाक्यांशों की दो बार उद्घोषणा की जाती है, नमाज़ी प्रत्येक वाक्यांश का तयशुदा जवाब देते हैं। यही है अजान का अभिप्राय ...!

Friday, September 3, 2010

अपने आप में नायाब है यह पहल...










कहते हैं समय ठहरता नहीं , मौसम बदलते हैं , तेवर बदलते हैं , चाँद भी पूर्णता से परे होता है
और अमावस की रात आती है ... यूँ कहें अमावस जीवन का सत्य है, एक अध्यात्म की खोज -
जहाँ से ज्ञान मार्ग शुरू होता है ........
यह कहना है कवियित्री रश्मि प्रभा का , जिनके संचालन-समन्वयन में आज से वटवृक्ष का शुभारंभ किया जा रहा है

वटवृक्ष पर आज पढ़िए-
मुक्ति ! (यहाँ किलिक करें )

Sunday, August 15, 2010

देश को विकास के चरम पर ले जाएँ : यही है शुभकामनाएं !


देश की स्वतन्त्रता का यह पवित्र दिवस हमें अपने समाज .संस्कृति और मर्यादा के मूलभूत तत्वों को और ज्यादा मजबूत करने का सन्देश देता है ।
आज के इस पवित्र दिवस पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए , कि स्वयं से जुड़े हुए समस्त व्यक्तियों को ज्यादा से ज्यादा शिक्षित करने की दिशा में कार्य करेंगे, ताकि हम अपने इस महान देश को विकास के चरम पर ले जाने में सफल हो सकें ।
जय हिंद !
शुभेच्छु-
रवीन्द्र प्रभात

Tuesday, August 10, 2010

वर्ष के श्रेष्ठ आदर्श ब्लोगर का सम्मान

पहचानिए ये हैं हिंदी चिट्ठाकारी के जाने-माने स्तंभ
जिन्हें अलंकृत किया गया है -
वर्ष के श्रेष्ठ आदर्श ब्लोगर के रूप में
यहाँ ....किलिक करें
और शुभकामनाएं दें
यदि इनके बारे में विस्तार से जाना हो तो -
यहाँ किलिक करें