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Saturday, June 11, 2011
दलित समाज की व्यथा
Posted by रवीन्द्र प्रभात at 8:27 PM 7 comments Links to this post
Labels: उपन्यास, ताकि बचा रहे लोकतंत्र, समीक्षा
Wednesday, June 8, 2011
सुबह-ए-बनारस
करतालों की जगह
बजने लगा है पाखण्ड
अन्धविश्वास
रुढियों को कंधे पे लटकाए
सीढियां चढ़ रहा है
चट्ट चट्ट
लज्जित है सुबह की
सूर्य की किरणें
खंड-खंड तोता रटंत
यजमान लुभाते आख्यान
एक अखंड मुजरा
एक तेलौस मेज पर
टेल हुए नाश्ते के सामान
फैला पाश्चात्य
सुबह-ए- बनारस !
- रवीन्द्र प्रभात
Posted by रवीन्द्र प्रभात at 1:28 AM 9 comments Links to this post
Labels: कविता
Monday, September 6, 2010
गुरु का अभिप्राय
Posted by रवीन्द्र प्रभात at 12:53 AM 15 comments Links to this post
Labels: शब्द व्याख्या
Saturday, September 4, 2010
अज़ान का मतलब है उद्घोषणा
हमारा भारतीय समाज कई संस्कृति और कई भाषाओं का अनोखा गुलदस्ता है , गाहे- बगाहे हमें विभिन्न भाषाओँ के उन शब्दों को अंगीकार करने की आवश्यकता महसूस होती है जो हिन्दी में घुली-मिली है । इन्हीं भाषाओं में से एक है अरबी भाषा , जिसके बहुतेरे शब्द हिन्दी और उर्दू भाषा में काफी प्रमुखता के साथ प्रयुक्त होते रहे हैं । वर्णानुक्रम में यद्यपि हम अ श्रेणी के शब्दों की व्याख्या प्रस्तुत कर रहे हैं .....इसीक्रम में एक शब्द आया है "अजान" जिसका प्रयोग उर्दू और हिन्दी में सामान रूप से आम-बोलचाल में होता है ......, आईये इस शब्द के बारे में विस्तार से जानने का प्रयास करते हैं -
(अरबी में अधान: उद्घोषणा), शुक्रवार (जुमे) की सार्वजनिक नमाज़ और पांच दैनिक नमाज़ों के लिये मुस्लिम पुकार। इसकी घोषणा मुअज्जिन करता है, जो अपने अच्छे चरित्र के कारण मस्जिद का सेवक चुना जाता है, छोटी मस्जिदों में वह दरवाजे़ पर या बग़ल में खड़े होकर और बड़ी मस्जिदों में मीनार पर चढ़कर अज़ान देता है। मूलतः अज़ान प्रार्थना के लिये बुलावा था, लेकिन परंपरा के अनुसार, मुहम्मद साहब ने इस बुलावे को ज़्यादा सम्मानजनक बनाने की दृष्टि से अपने शिष्यों से विचार-विमर्श किया, अब्द अल्लाह बिन जायद को सपना आने पर कि निष्ठावानों को कोई आवाज़ लगाकर बुलाए, मामला तय हो गया। सुन्नी मत की मानक अज़ान का अनुवाद इस प्रकार किया जा सकता है: ‘अल्लाह सबसे महान है। मैं मानता हूं कि अल्लाह के अलावा और कोई ईश्वर नहीं है।‘ मैं स्वीकार करता हूं कि मुहम्मद अल्लाह के पैग़ंबर हैं। नमाज़के लिए आओ। मुक्ति के लिए आओ। अल्लाह सबसे महान है। अल्लाह के अलावा और कोई ईश्वर नहीं हैं।‘ पहले वाक्यांश की चार बार उद्घोषणा की जाती है और अंतिम वाक्यांश की एक बार तथा अन्य सभी वाक्यांशों की दो बार उद्घोषणा की जाती है, नमाज़ी प्रत्येक वाक्यांश का तयशुदा जवाब देते हैं। यही है अजान का अभिप्राय ...!
Posted by रवीन्द्र प्रभात at 1:30 PM 7 comments Links to this post
Labels: अलफाबेट- अ, अल्फावेट-अ
Friday, September 3, 2010
अपने आप में नायाब है यह पहल...

कहते हैं समय ठहरता नहीं , मौसम बदलते हैं , तेवर बदलते हैं , चाँद भी पूर्णता से परे होता है
और अमावस की रात आती है ... यूँ कहें अमावस जीवन का सत्य है, एक अध्यात्म की खोज -
जहाँ से ज्ञान मार्ग शुरू होता है ........
यह कहना है कवियित्री रश्मि प्रभा का , जिनके संचालन-समन्वयन में आज से वटवृक्ष का शुभारंभ किया जा रहा है
वटवृक्ष पर आज पढ़िए-
मुक्ति ! (यहाँ किलिक करें )
Posted by रवीन्द्र प्रभात at 1:51 AM 2 comments Links to this post
Labels: नयी पहल
Sunday, August 15, 2010
देश को विकास के चरम पर ले जाएँ : यही है शुभकामनाएं !
Posted by रवीन्द्र प्रभात at 5:41 PM 1 comments Links to this post
Labels: शुभकामनाएं
Tuesday, August 10, 2010
वर्ष के श्रेष्ठ आदर्श ब्लोगर का सम्मान
पहचानिए ये हैं हिंदी चिट्ठाकारी के जाने-माने स्तंभ
जिन्हें अलंकृत किया गया है -
वर्ष के श्रेष्ठ आदर्श ब्लोगर के रूप में
यहाँ ....किलिक करें
और शुभकामनाएं दें
यदि इनके बारे में विस्तार से जाना हो तो -
यहाँ किलिक करें
Posted by रवीन्द्र प्रभात at 3:57 AM 5 comments Links to this post
Labels: सम्मान





















